Gulzar Shayari

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Gulzar Shayari in Hindi

गुलज़ार साहब एक महान लेखक हैं. उनके द्वारा लिखी शायरी, ग़ज़ल दिल को छू जाती है, यहाँ पर हमने ऐसी ही गुलज़ार साहब के द्वारा लिखी हुई कुछ लोकप्रिय शायरियों को एकत्रित किया है जो आपको बहुत पसंद आएँगी।

Gulzar Shayari

Gulzar Shayari in Hindi : Gulzar sahab is one of the most popular writer in India. Also, the best filmmakers and lyricists. Gulzar Sahab Writes Thousand of Beautiful Ghazal, Shayari, Poetry, Quotes, Alfaaz, and Poems in Hindi & Urdu. Her words touch everyone’s heart. Today we have Collected some heart-touching Shayari’s of Gulzar Sahab.

इश्क़ की तलाश में
क्यों निकलते हो तुम,
इश्क़ खुद तलाश लेता है
जिसे बर्बाद करना होता है।

 

तुझ से बिछड़ कर
कब ये हुआ कि मर गए,
तेरे दिन भी गुजर गए
और मेरे दिन भी गुजर गए.

 

आऊं तो सुबह,
जाऊं तो मेरा नाम शबा लिखना,
बर्फ पड़े तो
बर्फ पे मेरा नाम दुआ लिखना

वो शख़्स जो कभी
मेरा था ही नही,
उसने मुझे किसी और का भी
नही होने दिया.

 

लौटने का ख्याल भी आए
तो बस चले आना,
इंतजार आज भी बड़ी
बेसब्री से है तुम्हारा..

 

Lautne ka khyal bhi aaye
To bas chale aana,
Intjaar aaj bhi badi
besbri se hai tumhara…

 

उनकी ना थी कोई खता
हम ही गलत समझ बैठे
वो मोहब्बत से बात करते थे
हम मोहब्बत समझ बैठे !

किसी ने मुझसे पूछा की
दर्द की कीमत क्या है.?
मैंने कहा, मुझे नही पता
मुझे लोग फ्री में दे जाते हैं !

 

Kisi ne mujhse puchha ki
Dard ki keemat kya hai.?
Maine kaha, mujhe nahi pata
Mujhe log free me de jate hain.!

 

तमाशा जिंदगी का हुआ,
कलाकार सब अपने निकले !

 

मुकम्मल इश्क से ज्यादा तो चर्चे
अधूरी मोहब्बत के होते हैं !

https://thoughtoftheday.in/web-stories/gulzar-shayari

 

दोस्ती रूह में उतरा हुआ
रिश्ता है साहब,
मुलाकातें कम होने से
दोस्ती कम नही होती..

गुस्सा भी क्या करूं तुम पर
तुम हंसते हुए बेहद अच्छे लगते हो !

 

बहुत कम लोग हैं
जो मेरे दिल को भाते हैं,
और उससे भी बहुत कम हैं
जो मुझे समझ पाते हैं..

 

इतने बुरे नही थे
जितने इल्ज़ाम लगाए लोगों ने,
कुछ किस्मत खराब थी
कुछ आग लगाई लोगों ने..

 

कोई रंग नही होता
बारिश के पानी में,
फिर भी फिजा को रंगीन
बना देती है..

 

हंसना मुझे भी आता था
पर किसी ने रोना सिखा दिया,
बोलने में माहिर हम भी थे
किसी ने चुप रहना सिखा दिया..

दिल तो रोज़ कहता है
कि तुम्हे कोई सहारा चाहिए,
फिर दिमाग कहता है
क्यों तुम्हे धोखा दुबारा चाहिए..

 

आइने के सामने खड़े होकर
खुद से ही माफी मांग ली मैंने,
सबसे ज्यादा अपना ही दिल दुखाया है
औरों को खुश करते करते..

 

नजर भी ना आऊं
इतना भी दूर ना करो मुझे,
पूरी तरह बदल जाऊं
इतना भी मजबूर मत करो मुझे..

 

कमियां तो पहले भी थीं मुझमें
अब जो बहाना ढूंढ़ रहे हो
तो बात अलग है…

 

वो सफर बचपन के अब तक
याद आते हैं मुझे,
सुबह जाना हो कहीं तो
रात भर सोते नही थे..!

बातों से सीखा है हम ने
आदमी को पहचानने का फन
जो हल्के लोग होते हैं
हर वक़्त बातें भारी भारी करते हैं..

 

तिनका सा मै और समुंदर सा इश्क,
डूबने का डर और डुबाना ही इश्क..

 

जिसका हक है उसे ही मिलेगा,
इश्क पानी नही जो सबको पिला दें

 

सच बड़ी काबिलियत से
छुपाने लगे हैं हम,
हाल पूछने पर बढ़िया
बताने लगे हैं हम..!

 

हम झूठों के बीच में सच बोल बैठे,
वो नमक का शहर था
और हम जख्म खोल बैठे…

 

रोना उनके लिए
जो तुम पर निसार हो,
उसके लिए क्या रोना
जिनके आशिक़ हजार हों..

इसलिए पसंद है किताब मुझे
वो टूटकर बिखर जाना पसंद करेगी
मगर अपने लफ्ज़ बदलना नही..

 

जाने वाला कमियां देखता है,
निभाने वाला काबिलियत..

 

सच कहा था
एक फकीर ने मुझसे,
तुझे मोहब्बत तो मिलेगी
पर तड़पाने वाली !

 

अगर मोहब्बत उससे ना मिले
जिसे आप चाहते हो,
तो मोहब्बत उसको जरूर देना
जो आपका चाहते हैं…

गलती तेरी थी या
मेरी क्या फर्क पड़ता है
रिश्ता तो हमारा था ना।

 

पल्लू गिर गया,
पर वो घबराई नहीं
उसे यकीन था मेरी
नजर झुकी होगी..

 

कहने को तो बस
बातें हो जाती हैं,
पर दिल खोलकर बात किए हुए
जमाना हो गया….

 

अब मत मिलना
तुम दोबारा मुझे,
वक़्त बहुत लगा है
खुद को संभालने में..!!

 

फिक्र है इज्जत की तो
मोहब्बत छोड़ दो जनाब,
आओगे इश्क की गली में
तो चर्चे जरूर होंगे..!!

किसी को उजाड़ कर
बसे तो क्या बसे,
किसी को रुला कर
हंसे तो क्या हंसे..!!

 

तुम्हारी आदत सी
हो गई थी हमें,
मालूम तो हमे भी था कि
तुम नसीब में नही हो.

 

हर कोई परेशान है
मेरे कम बोलने से,
और मै परेशान हूं
अपने अंदर के शोर से..!!

 

कयामत तक याद करोगे
किसी ने दिल लगाया था,
एक होने की उम्मीद भी न थी
फिर भी पागलों की तरह चाहा था।

 

अब टूट गया दिल
तो बवाल क्या करें,
खुद ही किया था पसंद
अब सवाल क्या करें ?

“ सब तरह की दीवानगी
से वाकिफ हुए हम,
पर मा जैसा चाहने वाला
जमाने भर में ना था ! “

 

तुझे पाने की जिद थी
अब भुलाने का ख्वाब है,
ना जिद पूरी हुई और
ना ही ख्वाब..

 

नही करता मै तेरा जिक्र
किसी तीसरे से,
तेरे बारे में बात सिर्फ
खुदा से होती है।

 

मोहब्बत में अक्सर ऐसा होता है,
पूरी दुनिया से लड़ने वाला इंसान
अपने मन पसंद इंसान से हार जाता है।

 

ठुकराया हमने भी है
बहुतों को तेरे खातिर
तुझसे फासला भी शायद
उनकी बद्दुआओं का असर है।

दर्द भी वही देते हैं
जिन्हे हक़ दिया जाता है,
वरना गैर तो धक्का लगने पर
भी माफ़ी मांग लिया करते हैं।

 

जो बीत गया है वो अब दौर न आएगा,
इस दिल में सिवा तेरे कोई और न आएगा,
घर फूंक दिया हमने, अब राख उठानी है,
जिंदगी और कुछ नही, तेरी मेरी कहानी है।

 

अपनी पीठ से निकले
खंजरों को जब गिना मैंने
ठीक उतने ही निकले
जितनो को गले लगाया था !

 

मेरी आंखों ने पकड़ा है
उन्हें कई बार रंगे हाथ
वो इश्क करना तो चाहते हैं
मगर घबराते बहुत हैं !

 

जो हैरान हैं मेरे सब्र पर
उनसे कह दो जो आंसू जमीन पर
नहीं गिरते वो दिल चीर देते हैं..

मुझे मालूम था कि वो
मेरा हो नही सकता,
मगर देखो मुझे फिर भी
मोहब्बत हो गई उससे..

 

बस इतना सा असर होगा
हमारी यादों का,
की कभी कभी तुम बिना
बात के मुस्कुराओगे..

 

सफर छोटा ही सही
पर यादगार होना चाहिए,
रंग सांवला ही सही
पर वफादार होना चाहिए..

 

बड़े बेताब थे वो
मोहब्बत करने को हमसे
जब हमने भी कर ली तो
उनका शौक बदल गया !

हमेशा से तो नही रहा होगा
तू भी सख्त दिल
तेरी भी मासूमियत से भी
किसी ने खेला होगा !!

हर पल में हंसने का
हुनर था जिनके पास,
आज वो रोने लगे हैं तो
कोई बात तो होगी ना !

 

लगता है जिंदगी
आज खफा है,
चलिए छोड़िए
कौनसी पहली दफा है !

 

कौन कहता है कि
हम झूठ नही बोलते,
एक बार खैरियत
तो पूछ के देखिए..

 

थोड़ा सा रफू
कर के देखिए ना
फिर से नई सी लगेगी,
जिंदगी ही तो है..

 

मांगा नही रब से तुम्हे
लेकिन इशारा तुम्हीं पर था,
नाम बेशक नही लिया
मगर पुकारा तुम्हीं को था..

सालों बाद मिले वो
गले लगाकर रोने लगे,
जाते वक़्त जिसने कहा था
तुम्हारे जैसे हजार मिलेंगे..

 

आज थोड़ी बिगड़ी है
कल फिर सवांर लेंगे
जिंदगी है जो भी होगा
संभाल लेंगे…

 

वो हमे भूल ही गए होंगे
भला इतने दिनों तक
कौन खफा रहता है..

 

सब तारीफ कर रहे थे
अपने अपने महबूब का,
हम नीद का बहाना बना कर
महफ़िल छोड़ आए..

 

उतार कर फेंक दी उसने
तोहफे में मिली पायल,
उसे डर था छनकेगी तो
याद जरूर आऊंगा मै..

 

बहुत करीब से अनजान बनके
गुजरा है वो शख्स,
जो कभी बहुत दूर से
पहचान लिया करता था..

जर्रा जर्रा समेट कर
खुद को बनाया है मैंने,
मुझसे ये ना कहना
बहुत मिलेंगे तुम जैसे..

 

मेरे कंधे पर कुछ यूं गिरे उनके आंसू ,
कि सस्ती सी कमीज़ अनमोल हो गई..

 

तन्हाइयां कहती हैं
कोई महबूब बनाया जाए,
जिम्मेदारियां कहती हैं
वक़्त बर्बाद बहुत होगा..

 

सब खफा हैं मेरे लहजे से,
पर मेरे हालात से वाकिफ
कोई नहीं..

आखिरी नुकसान था तू जिंदगी में,
तेरे बाद मैंने कुछ खोया ही नहीं..

 

कोई तो करता होगा हमसे भी
खामोश मोहब्बत..
किसी का हम भी अधूरा
इश्क रहे होंगे…

 

उम्मीद भी अजनबी लगती है
और दर्द पराया लगता है
आईने में जिसको देखा था
बिछड़ा हुआ साया लगता है

 

कहीं किसी रोज यूं भी होता
हमारी हालत तुम्हारी होती
जो रातें हमने गुजारी मरके
वो रातें तुमने गुजारी होती

 

ख्वाबी ख्वाबी सी लगती है दुनिया
आँखों में ये क्या भर रहा है
मरने की आदत लगी थी
क्यूं जीने को जी कर रहा है

 

हमने देखी है उन आँखों की खुशबू
हाथ से छूके इसे रिश्तों का इल्ज़ाम न दो
सिर्फ़ एहसास है ये रूह से महसूस करो
प्यार को प्यार ही रहने दो कोई नाम न दो

 

मुस्कुराना, सहते जाना, चाहने की रस्म है
ना लहू ना कोई आँसू इश्क़ ऐसा ज़ख्म है

 

टूटी फूटी शायरी में
लिख दिया है डायरी में
आख़िरी ख्वाहिश हो तुम
लास्ट फरमाइश हो तुम

 

ख़ामोश रहने में दम घुटता है
और बोलने से ज़बान छिलती है
डर लगता है नंगे पांव मुझे
कोई कब्र पांव तले हिलती है

 

शाम से आँख में नमी सी है
आज फिर आपकी कमी सी है

 

तुम मिले तो क्यों लगा मुझे,
खुद से मुलाकात हो गई
कुछ भी तो कहा नही मगर,
ज़िंदगी से बात हो गई

 

क्यूं बार बार लगता है मुझे
कोई दूर छुपके तकता है मुझे
कोई आस पास आया तो नही
मेरे साथ मेरा साया तो नही

 

जीना भूले थे कहां याद नहीं!
तुमको पाया है जहाँ
सांस फिर आई वहीं

 

वो शाम कुछ अजीब थी,
ये शाम भी अजीब है
वो कल भी पास पास थी
वो आज भी करीब है

 

वक्त सालों की धुंध से
निकल जायेगा
तेरा चेहरा नज़र से
पिघल जायेगा

 

मेरे उजड़े उजड़े से होठों में
बड़ी सहमी सहमी रहती है जबाँ
मेरे हाथों पैरों में खून नही
मेरे तन बदन में बहता है धुँआ

 

वो चेहरे जो रौशन हैं लौ की तरह
उन्हें ढूंढने की जरूरत नही
मेरी आँख में झाँक कर देख लो
तुम्हें आइने की जरूरत नही

 

इतना लंबा कश लो यारो,
दम निकल जाए
जिंदगी सुलगाओ यारों,
गम निकल जाए

 

उड़ते पैरों के तले जब बहती है जमीं
मुड़के हमने कोई मंज़िल देखी तो नही
रात दिन हम राहों पर शामो सहर करते हैं
राह पे रहते हैं यादों पे बसर करते हैं

 

खून निकले तो ज़ख्म लगती है
वरना हर चोट नज़्म लगती है.

 

दबी-दबी साँसों में सुना था मैंने
बोले बिना मेरा नाम आया
पलकें झुकी और उठने लगीं तो
हौले से उसका सलाम आया

 

धीरे-धीरे ज़रा दम लेना
प्यार से जो मिले गम लेना
दिल पे ज़रा वो कम लेना

 

कोई वादा नही किया लेकिन
क्यों तेरा इंतज़ार रहता है
बेवजह जब क़रार मिल जाए
दिल बड़ा बेकरार रहता है

 

इस दिल में बस कर देखो तो
ये शहर बड़ा पुराना है
हर साँस में कहानी है
हर साँस में अफ़साना है

 

झुकी हुई निगाह में, कहीं मेरा ख्याल था
दबी दबी हँसी में इक, हसीन सा गुलाल था
मै सोचता था, मेरा नाम गुनगुना रही है वो
न जाने क्यूं लगा मुझे, के मुस्कुरा रही है वो

 

वो बेपनाह प्यार करता था मुझे
गया तो मेरी जान साथ ले गया

 

ऐसा कोई ज़िंदगी से वादा तो नही था
तेरे बिना जीने का इरादा तो नही था.

 

जाने कैसे बीतेंगी
ये बरसातें
माँगें हुए दिन हैं,
माँगी हुई रातें.

 

प्यार में अज़ीब ये रिवाज़ है,
रोग भी वही है जो इलाज है.

 

एक बीते हुए रिश्ते की
एक बीती घड़ी से लगते हो
तुम भी अब अजनबी से लगते हो

 

टकरा के सर को जान न दे दूं तो क्या करूं
कब तक फ़िराक-ए-यार के सदमे सहा करूं
मै तो हज़ार चाहूँ की बोलूँ न यार से
काबू में अपने दिल को न पाऊं तो क्या करूं

 

तू समझता क्यूं नही है
दिल बड़ा गहरा कुआँ है
आग जलती है हमेशा
हर तरफ धुआँ धुआँ है

 

कोई आहट नही बदन की कहीं
फिर भी लगता है तू यहीं है कहीं
वक्त जाता सुनाई देता है
तेरा साया दिखाई देता है

 

उम्मीद तो नही
फिर भी उम्मीद हो
कोई तो इस तरह
आशिक़ शहीद हो

 

पता चल गया है के मंज़िल कहां है
चलो दिल के लंबे सफ़र पे चलेंगे
सफ़र ख़त्म कर देंगे हम तो वहीं पर
जहाँ तक तुम्हारे कदम ले चलेंगे

 

गुल पोश कभी इतराये कहीं
महके तो नज़र आ जाये कहीं
तावीज़ बनाके पहनूं उसे
आयत की तरह मिल जाये कहीं

 

तेरे इश्क़ में तू क्या जाने
कितने ख्वाब पिरोता हूं
एक सदी तक जागता हूं मैं
एक सदी तक सोता हूं

 

सुरमे से लिखे तेरे वादे
आँखों की जबानी आते हैं
मेरे रुमालों पे लब तेरे
बाँध के निशानी जाते हैं

 

उतर रही हो या
चढ़ रही हो
क्या मेरी मुश्किलों को
पढ़ रही हो

 

तुम्हें जिंदगी के उजाले मुबारक
अंधेरे हमें आज रास आ गए हैं
तुम्हें पा के हम खुद से दूर हो गए थे
तुम्हें छोड़कर अपने पास आ गए हैं

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