Gulzar Shayaris | Gulzar Ki Shayari | गुलजार साहब की मशहूर शायरी

Gulzar Shayaris | Gulzar Ki Shayari | गुलजार साहब की मशहूर शायरी

Gulzar Shayaris – भारतीय फिल्म इंडस्ट्री के लोकप्रिय गीतकार, पटकथा, लेखक फिल्म निर्देशक और विश्व प्रसिद्ध शायर गुलजार जिनका पूरा नाम “सम्पूर्ण सिंह कालरा” हैं. गुलजार को सिनेमा जगत में उपलब्धि के लिए कई सम्मान से समानित किया गया हैं. जिसमे भारत के सर्वोच्च सम्मान पद्म भूषण, ग्रेमी अवार्ड और विश्व प्रशिध आस्कर अवार्ड से भी समानित किया गया हैं.

दोस्तों इस पोस्ट में गुलजार साहब की मशहूर शायरी जो काफी लोकप्रिय हैं. वह दी गई हैं. आपको यह Gulzar Ki Shayari बहुत पसंद आएगी.

गुलजार साहब का जन्म 18 अगस्त 1936 को दिना झेलम जिला पंजाब में हुआ था. जो अब पाकिस्तान में हैं. भारत के बटवारे के बाद इनका परिवार अमृतसर पंजाब में आ गया. उसके बाद गुलज़ार साहब मुंबई चले गए.

जब गुलज़ार साहब मुंबई पहुंचे तो वहा पर वह एक गैरेज में मैकेनिकल की नौकरी करने लगे. उन्होंने शौकिया तौर पर शायरी और कविता लिखना शुरू कर दिया था. फिर उनको फिल्मो में कई डायरेक्टर के साथ उनके सहायेक के रूप में काम करने को मिला. गुलज़ार साहब ने फिल्म बंदनी से अपना गीत लेखन का काम शुरू किया था.

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Gulzar Shayaris | Gulzar Ki Shayari | गुलजार साहब की मशहूर शायरी

(1) शायर बनना बहुत आसान हैं,
बस एक अधूरी मोहब्बत की मुकम्मल डिग्री चाहिए।

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Shayar Bananaa Bahuta Aasaan Hain,
Bas Ek Adhuri Mohabbat Ki Mukammal Degree Chahiye…

(2) मिलता तो बहुत कुछ है इस ज़िन्दगी में,
बस हम गिनती उसी की करते है जो हासिल ना हो सका।

Milana To Bahut Kuchh Hain Is Zindagi Me,
Bas Ham Ginati Usi Ki Karate Hain, Jo Hasil Na Ho Saka..

(3) वो चीज़ जिसे दिल कहते हैं,
हम भूल गए हैं रख के कहीं।

Wo Chiz Jise Dil Kahate Hain,
Ham Bhul Gaye Hain Rakh Ke Kahi….

(4) तेरे जाने से तो कुछ बदला नहीं,
रात भी आयी और चाँद भी था, मगर नींद नहीं।

Tere JANE Se To Kuchh Badala Nahi,
Raat Bhi Aayi Chand Bhi Tha, Magar Neend Nahi…

(5) कभी तो चौक के देखे कोई हमारी तरफ़,
किसी की आँखों में हमको भी को इंतजार दिखे।

Kabhi To Cauk Ke Dekhe Koi Hamari Taraf,
Kisi Ki Ankhon Me Hamako Bhi Ko Intzaar Dikhe..

Gulzar Shayaris

(6) दिल अगर हैं तो दर्द भी होंगा,
इसका शायद कोई हल नहीं हैं।

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Dil Agar Hain To Dard Bhi Hoga,
Isaka Shayad Koi Hal NAHI Hoga..

(7) रोई है किसी छत पे, अकेले ही में घुटकर,
उतरी जो लबों पर तो वो नमकीन थी बारिश।

Royi Hain Kisi Chhat Pe, Akeli Hi Me Ghutkat,
Utari Jo Labon Par To Wo Namkin Thi Barish..

(8) दिन कुछ ऐसे गुज़ारता है कोई,
जैसे एहसान उतारता है कोई।

Din Kuchh Ese Guzarata Hain Koi,
Jaise Ehasaaan Utarata Hain Koi..

(9) हम तो अब याद भी नहीं करते,
आप को हिचकी लग गई कैसे?

Ham To Ab Yaad Bhi Nahi Karate,
Aap Ko Hichakiyan Lag Kaise Lagi?

(10) कभी जिंदगी एक पल में गुजर जाती हैं,
और कभी जिंदगी का एक पल नहीं गुजरता।

Kabhi Zindagi Ek Pal Me Guzar Jati Hain,
Aur Kabhi Zindagi Ka Ek Pal Nahi Guzarata..

Gulzar Ki Shayari

(11) उसने कागज की कई कश्तिया पानी उतारी और,
ये कह के बहा दी कि समन्दर में मिलेंगे।

Gulzar Shayaris | Gulzar Ki Shayari | गुलजार साहब की मशहूर शायरी
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Usane Kagaz Ki Kayi Kashtiyan Pani Utari Aur
Ye Kah Kar Baha Di Ki Samundar Me Milenge..

(12) सुना हैं काफी पढ़ लिख गए हो तुम,
कभी वो भी पढ़ो जो हम कह नहीं पाते हैं।

Suna Hain Kafi Padh Likh Gaye Hoo Tum,
Kabhi Wo Bhi Padhon Jo Ham Kah Nahi Pate Hain..

(13) बिगड़ैल हैं ये यादे,
देर रात को टहलने निकलती हैं।

Bigadail Hain Ye Yaade,
Der Raat Tak Tahalane Nikalati Hain..

(14) मैं दिया हूँ! मेरी दुश्मनी तो सिर्फ अँधेरे से हैं,
हवा तो बेवजह ही मेरे खिलाफ हैं।

Main Diya Hun! Meri Dushamani To Sirf Andhere Se HAIN,
Hawa To Bewajah Hi Mere Khilaf Hain..

(15) कोई पुछ रहा हैं मुझसे मेरी जिंदगी की कीमत,
मुझे याद आ रहा है तेरा हल्के से मुस्कुराना।

Koi Puchh Raha Hain Mujhse Meri Zindagi Ki Kimat,
Mujhe Yaad Aa Raha Hain Tera Halke Se Muskurana..

गुलजार साहब की मशहूर शायरी

(16) मैंने दबी आवाज़ में पूछा? मुहब्बत करने लगी हो?
नज़रें झुका कर वो बोली! बहुत।

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Maine Dabi Aawaz Me Puchh? Mohabbat Karane Lagi Ho?
Nazare Jhuka Kar Wo Boli! Bahut…

(17) बहुत अंदर तक जला देती हैं,
वो शिकायते जो बया नहीं होती।

Bahut Andar Tak Jala Deti Hain,
Wo Shikayate Jo Bayan Nahi Hoti..

(18) अच्छी किताबें और अच्छे लोग, तुरंत समझ में नहीं आते,
उन्हें पढना पड़ता हैं।

Achchi Kitabe Aur Achche Log Turnt Samajh Me Nahi Aate,
Unhe Padhana Hota Hain..

(19) कुछ अलग करना हो तो भीड़ से हट के चलिए,
भीड़ साहस तो देती हैं मगर पहचान छिन लेती हैं।

Kuchh Alag Karana Ho To, Bheed Se Hat Ke Chaliye,
Bheed Sahas Deti Hain, Magar Pahachaan Chhin Leti Hain..

(20) फिर वहीं लौट के जाना होगा,
यार ने कैसी रिहाई दी है।

Fir Wahi Laut Ke Jana Hoga,
Yaar Ne Kaisi Rihayi Di Hain..

Gulzar Shayaris

(21) आप के बाद हर घड़ी हम ने,
आप के साथ ही गुज़ारी है।

Gulzar Shayaris | Gulzar Ki Shayari | गुलजार साहब की मशहूर शायरी
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Aap Ke Baad Har Ghadi Ham Ne,
Aap Ke Sath Hi Guzari Hain..

(22) हम ने अक्सर तुम्हारी राहों में,
रुक कर अपना ही इंतिज़ार किया।

Ham Ne Aksar Tumhari Raahon Me
Ruk Kar Apana Hi Intzaar Kiya..

(23) ज़िंदगी यूँ हुई बसर तन्हा,
क़ाफ़िला साथ और सफ़र तन्हा।

Zindagi Yun Hi Basar Tanha,
Kafila Sath Aur Safar Tanha..

(24) वक़्त रहता नहीं कहीं टिक कर,
आदत इस की भी आदमी सी है।

Waqt Rahata Nahi Kahi Tik Ke,
Aadat Is Ki Adami Si Hain..

(25) आइना देख कर तसल्ली हुई,

हम को इस घर में जानता है कोई।
Aayina Dekh Kar Tasalli Huyi,
Hamko Is Ghar Me Janata Hain Koi..

Gulzar Ki Shayari

(26) मैं हर रात सारी ख्वाहिशों को खुद से पहले सुला देता,
हूँ मगर रोज़ सुबह ये मुझसे पहले जाग जाती है।

Gulzar Shayaris | Gulzar Ki Shayari | गुलजार साहब की मशहूर शायरी
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Main Har Raat Ki Khwahishon Ko Khud Se Pahale Sula Deta,
Hun Magar Roz Subah Ye Mujhase Pahalae Jaag Jati Hain…

(27) एक बार तो यूँ होगा, थोड़ा सा सुकून होगा,
ना दिल में कसक होगी, ना सर में जूनून होगा।

Ek Baar To U Hoga, Thoda Sa Sukun Hoga,
Naa Dil Me Kasak Hogi, Naa Sar Me Junun Hoga..

(28) छोटा सा साया था, आँखों में आया था,
हमने दो बूंदों से मन भर लिया।

Chhota Sa Saya Tha, Ankhon Me Aaya Tha.
Hamane Do Bundo Se man Bhar Liya..

(29) ज्यादा कुछ नहीं बदलता उम्र के साथ,
बस बचपन की जिद्द समझौतों में बदल जाती हैं।

Jyaada Kuchh nahi Badalata Umr Ke Sath,
Bas Bachapan Ki Zidd Samjhauto Me Badal Jati Hain..

(30) बचपन में भरी दुपहरी में नाप आते थे पूरा मोहल्ला,
जब से डिग्रियां समझ में आयी पांव जलने लगे हैं।

Bachapan Me Bhari Dupahari Me Naap Aate The Pura Mohalla,
Jab Se Degreeyan Damajh Me Aayi Panv Jalane Lage..

गुलजार साहब की मशहूर शायरी

(31) तन्हाई की दीवारों पर घुटन का पर्दा झूल रहा हैं,
बेबसी की छत के नीचे, कोई किसी को भूल रहा हैं।

Gulzar Shayaris | Gulzar Ki Shayari | गुलजार साहब की मशहूर शायरी
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Tanhaayi Ki Deewaaron Par Ghutan Ka Parda Jhul raha Hain,
Bebasi Ki Chhat Ke Neeche, Koi Kisi Ko Bhula Raha Hain..

(32) थोडा सा हस के थोडा सा रुला के,
पल यही जानेवाले हैं।

Thoda Sa Hans Ke Thoda Sa Rula Ke,
Pal Yahi Jane Wala Hain..

(33) हाथ छुटे भी तो रिश्ते नहीं नहीं छोड़ा करते,
वक्त की शाख से लम्हें नहीं तोडा करते।

Hath Chhute Bhi To Rishte Nahi Chhoda Karate,
Waqt Ki Shakh Se Lamhe Nahi Toda Karate…

(34) ये कैसा रिश्ता हुआ इश्क में वफ़ा का भला,
तमाम उम्र में दो चार छ: गिले भी नहीं।

Ye Kaisa Rishta Hua Ishq Me, Wafa Ka Bhala?
Tamaam Umr Me Do-Char-Chh: Jile Nhai..

(35) रात को चाँदनी तो ओढ़ा दो,
दिन की चादर अभी उतारी है।

Raat Ko Chadani To Odha Do,
Din Ki Chadar Abhi Utari HAIN..

Gulzar Shayaris

(36) आदतन तुम ने कर दिए वादे,
आदतन हम ने ए’तिबार किया।

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AadatanTum Ne Kar Diye Wade,
Aadatan Ham Ne Etibaar Kiya..

(37) कोई ख़ामोश ज़ख़्म लगती है,
ज़िंदगी एक नज़्म लगती है।

Koi Khamosh Zakhm Lagati HAI,
Zindagi Ek Nazm Lagati hain..

(38) जिस की आँखों में कटी थीं सदियाँ,
उस ने सदियों की जुदाई दी है।

Jsi Ki Ankhon Me Kati Thi Sadiyan,
Us Ne Sadiyaon Ki Judayi De Di..

(39) ख़ुशबू जैसे लोग मिले अफ़्साने में,
एक पुराना ख़त खोला अनजाने में।

Khushbu Jaise Log mile Afsaane Me,
Ek purana Khat Mila Anjaane Me..

(40) एक ही ख़्वाब ने सारी रात जगाया है,
मैं ने हर करवट सोने की कोशिश की।

Ek Hi Khwaab Ne Sari Raat jagaya Hain.
Main Ne Har karwat Sone Ki Koshish Ki..

Gulzar Ki Shayari

(41) सहमा सहमा डरा सा रहता है,
जाने क्यूं जी भरा सा रहता है।

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Sahama-Sahama Dara Sa Rahata Hain,
Jane Kyun Jee Bhara Sa Rahata Hain..

(42) मैं चुप कराता हूं हर शब उमड़ती बारिश को,
मगर ये रोज़ गई बात छेड़ देती है।

Main Chup Hun Har Shab Umadati Barish Ko,
Magar Ye Roz Gayi Baat Chhed Deti Hain..

(43) सीने में धड़कता जो हिस्सा हैं,
उसी का तो ये सारा किस्सा हैं।

Seene Me Dhadakata Jo Hissa Hain,
Usi Ka To Ye Saraa Kissa Hain..

(44) कैसे करें हम ख़ुद को तेरे प्यार के काबिल,
जब हम बदलते हैं, तुम शर्ते बदल देते हो।

Kaise Kare Khud Ko Tere Pyaar Ke Kabil,
Jab Ham Badalate Hain, Tum Sharten Badal Dete Ho..

(45) तकलीफ़ ख़ुद की कम हो गयी,
जब अपनों से उम्मीद कम हो गईं।

Taklif Khud Ki Kam Ho Gayi,
Jab Apano Se Ummid Kam Ho Gayi..

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गुलजार साहब की मशहूर शायरी

(46) कौन कहता हैं कि हम झूठ नहीं बोलते,
एक बार खैरियत तो पूछ के देखियें।

Kaun Kahata Hain Ki Ham Jhuth Nahi Bolate?
Ek Baar Kairiyat To Puchh Ke Dekhiye..

(47) किसी पर मर जाने से होती हैं मोहब्बत,
इश्क जिंदा लोगों के बस का नहीं।

Kisi Par mar Jane Se Hoti Hain Mohabbat,
Ishq Zinda Logon ke Bas Ka Nahi..

(48) शोर की तो उम्र होती हैं,
ख़ामोशी तो सदाबहार होती हैं।

Shor Ki To Umr Hoti Hain,
Khamoshi To Sadabhahaar Hoti hain..

(49) बेहिसाब हसरते ना पालिये,
जो मिला हैं उसे सम्भालिये।

Behisaab Hasarate Na Paliye,
Jo Mila Hain use Sambhaliye..

(50) कुछ जख्मो की उम्र नहीं होती हैं,
ताउम्र साथ चलते हैं, जिस्मो के ख़ाक होने तक।

Kuchh To Zakhmo Ki Umr Nahi Hoti Hain,
Taumr Sath Chalate Hain, Zismon Ke Khak Hone Tak..

Gulzar Shayaris

(51) हम तो समझे थे कि हम भूल गए हैं उनको,
क्या हुआ आज ये किस बात पे रोना आया?

Ham To Samjhe The Ki Ham Bhul Gaye Unako,
Kya Hua Aaj Ye Kis Baat Pe Rona Aaya?

(52) कुछ बातें तब तक समझ में नहीं आती,
जब तक ख़ुद पर ना गुजरे।

Kuchh Baate Tab Tak Samajh Me Nahi Aati,
Jab Tak Khud Par Naa Guzare..

(53) लकीरें हैं तो रहने दो,
किसी ने रूठ कर गुस्से में शायद खींच दी थी,

उन्ही को अब बनाओ पाला, और आओ कबड्डी खेलते हैं।।

Lakire Hain To Rarane Do,
Kisi Ne Ruth Kar Gusse Me Shayad Kheech Di Thi,
Unhi Ko Ab Banao Palaa, Aur Aao Kabaddi Khelate Hain..

(54) बीच आसमाँ में था बात करते- करते ही,
चांद इस तरह बुझा जैसे फूंक से दिया,
देखो तुम इतनी लम्बी सांस मत लिया करो।।

Beech Aasamaan Me Tha Baat Karate-Karate Hi,
Chand Is Tarah Bujha Jaise Funk Se Diya,
Dekho Tum Itani Lambi Sanse Mat Liya Karo..

(55) देर से गूँजतें हैं सन्नाटे,
जैसे हम को पुकारता है कोई।

हवा गुज़र गयी पत्ते थे कुछ हिले भी नहीं,
वो मेरे शहर में आये भी और मिले भी नहीं।।

Der Tak Gunjate Hain Sannate,
Jaise Ham Ko Pukarata Hain Koi.
Hawa Guzar Gayi Patte The Kuchh Hile Bhi Nahi,
Wo Mere Shahar Me Aaye Bhi Aur Mile Bhi NAHI..

Gulzar Hindi Shayari

(56) उधड़ी सी किसी फ़िल्म का एक सीन थी बारिश,
इस बार मिली मुझसे तो ग़मगीन थी बारिश।

कुछ लोगों ने रंग लूट लिए शहर में इस के,
जंगल से जो निकली थी वो रंगीन थी बारिश।।

Udhadi Si Kisi Film Ka Ek Seen Thi Barish,
Is Baar Mili Mujhko To Ghamgin Thi Barish.
Kuchh Logo Ne Rang Lut Liye Shahar Me Is Ke,
Jangal Se Jo Nikali Thi Wo Rangin Thi Barish..

(57) दर्द हल्का है साँस भारी है,
जिए जाने की रस्म जारी है।

Dard Halka Hain sans Bhari Hain,
Jiye Jane Ki Rasm Jari hain..

(58) किसने रास्ते मे चांद रखा था,
मुझको ठोकर लगी कैसे।

वक़्त पे पांव कब रखा हमने,
ज़िंदगी मुंह के बल गिरी कैसे।।

आंख तो भर आयी थी पानी से,
तेरी तस्वीर जल गयी कैसे।।।

Kisane Raste Me Cahnd Rakha Tha,
Mujhako Thokar Lagi Kaise?
Waqt Pe Panv Kab Rakha Hamane?
Zindagi Muh Ke Bal Geeri Kaise?
Ankh To Bhar Aayi Thi Pani Se,
Teri Tasveer Jal Gayi Kaise?

(59) सामने आए मेरे, देखा मुझे, बात भी की,
मुस्कुराए भी, पुरानी किसी पहचान की ख़ातिर,
कल का अख़बार था, बस देख लिया, रख भी दिया।।

Samane Aaye Mere, Dekha Mujhe Baat Ki,
Muskuraye Bhi, Purani Kisi Pahchan Ki Khatir,
Kal Ka Akhabaar Tha, Bas Dekh Liya, Rakh Bhi Diya..

(60) टूट जाना चाहता हूँ, बिखर जाना चाहता हूँ,
में फिर से निखर जाना चाहता हूँ।

मानता हूँ मुश्किल हैं,
लेकिन में गुलज़ार होना चाहता हूँ।।

Tut Jana Chahata Hun, Bikhar Jana Chahata Hun,
Main Fir Se Nikhar Jana Chahata Hun,
Manata Hun Mushkil Hain,
Lekin Main Gulzaar Hona Chahata Hun..

Romantic Gulzar Shayari

(61) मैंने मौत को देखा तो नहीं,
पर शायद वो बहुत खूबसूरत होगी।
कमबख्त जो भी उससे मिलता हैं,
जीना ही छोड़ देता हैं।।

Maine Maut Ko Dekha To Nahi?
Par Shayad Wo Khubsurat Hogi..
Kambakht Jo Bhi Usase Milata Hain,
Jeena Chhod Deta Hain..

(62) आदतन तुम ने कर दिए वादे,
आदतन हम ने ऐतबार किया।

तेरी राहो में बारहा रुक कर,
हम ने अपना ही इंतज़ार किया।।

अब ना मांगेंगे जिंदगी या रब,
ये गुनाह हम ने एक बार किया।।।

Aadatan Tum Ne Kar Diye Wade,
Aadatan Hamne Etbaar Kiya..
Teri Rahao Me Barha Ruk Kar,
Ham Ne Apana Hi Intzaar Kiya..
Ab Naa Mangenge Zindagi Ya Rab,
Ye Gunah Ham Ne Ek Baar Kiya..

(63) पलक से पानी गिरा है, तो उसको गिरने दो,
कोई पुरानी तमन्ना, पिंघल रही होगी।

Palak Se Pani Gira Hain, To Use Girane Do,
Koi Purani Tamanna, Pighal Rahi Hogi..

(64) ऐ हवा उनको कर दे खबर मेरी मौत की,
और कहना कि।
कफ़न की ख्वाहिश में मेरी लाश,
उनके आँचल का इंतज़ार करती है।

E Hawa Unako Kar De Khabar Meri Maut Ki,
Aur Kahana Ki,
Kafan Ki Khwahish Me Meri Lash,
Unake Anchal Ka Intzaar Karati Hain..

(65) कहू क्या वो बड़ी मासूमियत से पूछ बैठे है,
क्या सचमुच दिल के मारों को बड़ी तकलीफ़ होती है।

Kya Kahu Wo Badi masumiyat Se Puchh Baithe Hain,
Kya Sachmuch Dil Ke Maaro Ko Badi taklif Hoti Hain..

Gulzar Shayaris

(66) ना दूर रहने से रिश्ते टूट जाते हैं,
ना पास रहने से जुड़ जाते हैं।

यह तो एहसास के पक्के धागे हैं,
जो याद करने से और मजबूत हो जाते हैं।

Naa Dur Rahane Se Rishte Tut Jate Hain,
Naa Paas Rahane Se Jud Jate Hain.
Yah To Ehasaas Ke Pakke Dhage Hain,
Jo Yaad Karane Se Aur Majbut Ho Jate Hain..

(67) एक सो सोलह चाँद की रातें ,
एक तुम्हारे कंधे का तिल।

गीली मेहँदी की खुश्बू झूठ मूठ के वादे,
सब याद करादो, सब भिजवा दो,
मेरा वो सामान लौटा दो।।

Ek So Solah Chand Ki Raaten,
Ek Tumhare Kandhe Ka Til,
Gili Maihandi Ki Khushbu, Jhuth-Muth Ke Wade,
Sab Yaad Karado, Sab Sab Bhujwa Do,
Mera Wo Saamaan Lauta Do..

(68) इस दिल का कहा मनो एक काम कर दो,
एक बे-नाम सी मोहब्बत मेरे नाम करदो।

मेरी ज़ात पर फ़क़त इतना अहसान कर दो,
किसी दिन सुबह को मिलो, और शाम कर दो।।

Is Dil Ka Kaha Maano Ek Kaam Kar Do?
Ek Be-Naam Si Mohabbat Mere Naam Kar Do.
Meri Jaat Par Fakat Itana Ahasaan Kar Do,
Kisi Din Subah Ko Milo, Aur Sham Kar Do..

(69) मेरे दिल में एक धड़कन तेरी हैं,
उस धड़कन की कसम तू ज़िन्दगी मेरी है।

मेरी तो हर सांस में एक सांस तेरी हैं,
जो कभी सांस जो रुक जाए तो मौत मेरी हैं।।

Mere Dil Me Ek Dhadakan Hain Teri Hain,
Us Dhadakan Ki Kasam Tu Zindagi Meri Hain,
Meri To Har Sans Me Ek Sans Teri Hain,
Jo KABHI Sans Jo Ruk Jaye To Maut Meri Hain..

(70) मेरे दर्द को भी आह का हक़ हैं,
जैसे तेरे हुस्न को निगाह का हक़ है।

मुझे भी एक दिल दिया है भगवान ने,
मुझ नादान को भी एक गुनाह का हक़ हैं।।

Mere Dard Ko Bhi Aah Ka Haq Hai,
Jaise Tere Husn Ko Nigah Ka Haq Hai,
Mujhe Bhii Ek Dil Diya Hain Bhagwaan Ne,
Mujh Nadaan Ko Bhi Ek Gunaah Ka HAQ Hain..

Gulzar Hindi Shayari

(71) ग़म मौत का नहीं है,
ग़म ये के आखिरी वक़्त भी,
तू मेरे घर नहीं है।

Gham Maut Ka Nahi Hain,
Gham Ye Ke Akhiri Waqt Bhi,
Tu Mere Ghar Nahi Hain..

(72) तेरी यादों के जो आखिरी थे निशान,
दिल तड़पता रहा, हम मिटाते रहे।

ख़त लिखे थे जो तुमने कभी प्यार में,
उसको पढते रहे और जलाते रहे।

Teri Yaadon Ke Jo Akhiri The Nishan,
Dil Tadapata Raha, Ham Mitate Rahe..

Khat Likhe The Jo Tumane Kabhi pyaar Me,
Usako Padhate Rahe Aur Jalate Rahe..

(73) महदूद हैं दुआएँ मेरे अख्तियार में,
हर साँस हो सुकून की तू सौ बरस जिये।

Mahadud Hai Duwayen Mere Akhtiyar Me,
Har Sans Ho Sukun Ki Tu Sau Baras Jeeye..

(74) मैं तेरे इश्क़ की छाँव में जल-जलकर,
काला न पड़ जाऊं कहीं,
तू मुझे हुस्न की धूप का एक टुकड़ा दे।

Main Tere Ishq Ki Chhanv Me Jal-Jalkar,
Kala Na Pad Jau Kahi?
Tu Mujhe Husn Ki Dhoop Ka Ek Tukada De..

(75) अपने साए से चौंक जाते हैं,
उम्र गुज़री है इस क़दर तन्हा।

Apane Saye Se Chauk Jate Hain,
Umr Guzari Hain Is Kadar Tanha..

Romantic Gulzar Shayari

(76) कल का हर वाक़िआ तुम्हारा था,
आज की दास्ताँ हमारी है।

Kal Ka Vakiaa Tumhaara Tha,
Aaj Ki Dastan Hamari Hain..

(77) सुनो! जब कभी देख लुं तुमको।
तो मुझे महसूस होता है कि.
दुनिया खूबसूरत है।

Suno Jab Kabhi Dekh Lu Tumako,
To Mujhe Mahsus Hota Hain Ki,
Duniya Khubsurat Hain..

(78) एक सपने के टूटकर चकनाचूर हो जाने के बाद,
दूसरा सपना देखने के हौसले का नाम जिंदगी हैं।

Ek Sapane Ke Tutkar Chaknachur Ho Jaane Ke Baad,
Dusara Sapana Dekhane Ke Hausale Ka Naam Zindagi Hain..

(79) घर में अपनों से उतना ही रूठो,
कि आपकी बात और दूसरों की इज्जत,
दोनों बरक़रार रह सके।

Ghar Me Apano Se utana Hi Rutho,
Ki Aapki Baat Aur Dusaro Ki Izzat Dono Barkaraar Rahe..

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