कुछ अलग करना हो तो भीड़ से हट के चलिए, भीड़ साहस तो देती हैं मगर पहचान छिन लेती हैं

Gulzar shayari in hindi आँखों से आँसुओं के मरासिम पुराने हैं मेहमाँ ये घर में आएँ तो चुभता नहीं धुआँ

शाम से आँख में नमी सी है, आज फिर आप की कमी सी है. दफ़्न कर दो हमें के साँस मिले, नब्ज़ कुछ देर से थमी सी है

Gulzar shayari hindi वो चीज़ जिसे दिल कहते हैं, हम भूल गए हैं रख के कहीं

Gulzar shayari on life सहमा सहमा डरा सा रहता है जाने क्यूँ जी भरा सा रहता है

Gulzar sad shayari हाथ छूटें भी तो रिश्ते नहीं छोड़ा करते वक्त की शाख से लम्हे नहीं तोड़ा करते

मैं दिया हूँ ! मेरी दुश्मनी तो सिर्फ अँधेरे से हैं…. हवा तो बेवजह ही मेरे खिलाफ हैं !