सोचा था लिखूंगा तेरे और मेरे वफ़ा के किस्से, पर यार तूने तो स्याही में ही बेवफ़ाई घोल दी!

Gulzar Shayari

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बेपनाह चाहने से लेकर बेपरवाह हो जाने तक का सफर इश्क होता है!

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मेरा पूरा दिन सुस्ती में ही बीत जाता है, पर जब तुम से मिलता हूँ तो ये दिल स्वस्थ हो जाता है शायद ये ही इश्क़ है

Gulzar Shayari

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हो नसीब में तुम पता नही हमे बस एक उम्मीद पे जीता हुँ।

Gulzar Shayari

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कुछ बात बिगड़ती सी, कुछ बात सुलझती सी। कुछ अपनी सी, कुछ पराई सी जिंदगी है जनाब,!!! ये हर रोज साज़ बदलती है।

Gulzar Shayari

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आने वाले जाने वाले हर ज़माने के लिए आदमी मज़दूर है राहें बनाने के लिए

Gulzar Shayari

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"बेरोज़गार" सी हो गई है ज़िन्दगी अपनी मोहब्बत की नौकरी पर रख लो मुझे

Gulzar Shayari

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एक हसरत थी कि कभी हमे भी मनाये वो, पर ये दिल कम्बख्त कभी उनसे रूठा ही नहीं!

Gulzar Shayari

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डर लगता है कि कहीं खो ना दूँ तुम्हें, सच ये भी है कि कभी पाया ही नहीं तुम्हें

Gulzar Shayari

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इस दुनिया मे कोई किसी का हमदर्द नहीं होता, लाश को शमशान में रखकर अपने लोग ही पुछ्ते हैं। "और कितना वक़्त लगेगा"

Gulzar Shayari

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